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Showing posts from May, 2021

परशुराम की प्रतीक्षा खण्ड-१

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परशुराम की प्रतीक्षा ✍️✍️✍️ रामधारी सिंह दिनकर                    खण्ड-१ गर्दन पर किसका पाप वीर ढ़ोते हो ? शोणित से तुम किसका कलंक धोते हो ? उनका , जिनमें कारुण्य असीम तरल था, तारुण्य-ताप था नहीं ,न रंच गरल था; सस्ती सुकीर्ति पाकर जो फूल गए थे, निर्वीर्य कल्पनाओं में भूल गए थे,  गीता में जो त्रिपिटक-निकाय पढ़ते हैं, तलवार गला कर जो तकली गढ़ते हैं; शीतल करते हैं अनल प्रबुद्ध प्रजा का, शेरों को सिखलाते हैं धर्म अजा का; सारी वसुंधरा में गुरु-पद पाने को, प्यासी धरती के लिए अमृत लाने को जो संत लोग सीधे पाताल चले थे, (अच्छे हैं अब : पहले भी बहुत भले थे ।) हम उसी धर्म की लाश यहां ढोते है, शोणित से संतों का कलंक धोते हैं।                               Prashant Gautam                                    मुजफ्फरपुर

Sonu Sood A Real Hero

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सोनू सूद कौन है ? क्या सोनू सूद किसी क्षेत्र से विधायक है ?क्या सोनू सूद किसी क्षेत्र से सांसद हैं? क्या सोनू सूद किसी जिला के जिला अधिकारी हैं? क्या सोनू सूद प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी हैं? क्या सोनू सूद किसी राज्य के चीफ सेक्रेट्री हैं? क्या सोनू सूद कोई चिकित्सा पदाधिकारी है? क्या सोनू सूद किसी बड़े एनजीओ के मालिक है ? हमें तो लगता है सोनू सूद Self Employed  है जो अपने प्रतिभा के बदौलत ख़ुद के लिए दो वक़्त की रोटी तथा मजबूरों की मददगार साबित होते है। लेकिन सभी जिम्मेदार पुरुष जिसमें भारत के सांसद राज्य से विधायक भारतीय प्रशासनिक पदाधिकारी इत्यादि के ऊपर इतनी सारी उनकी अपनी कर्तव्य बाकी है लेकिन उन सबसे अधिक किसी एक व्यक्ति ने काम किया हो तो वह अभिनेता सोनू सूद है जिन्होंने इस आपातकाल के दौर में खुद को साबित किया कि अगर कोई इंसान शिद्दत से चाहे तो एक अकेला इंसान हजारों हजारों की मदद कर सकता है चाहे वह प्रतिदिन कमाने वाला दिहाड़ी मजदूर या करोड़ों अरबों कमाने वाले बड़े सेलिब्रिटी SureshRaina   We are Proud of You #SonuSood_A_Real_Hero Sir..... ☺️☺️☺️ ✍️✍️✍️ Prashant Gautam...

मजदूर

हमसे भारत , हम भारत भाग्य विधाता खुद के भाग्य लिए मरने को मजबूर हूं। हां मैं मजदूर हूं-हां मैं मजदूर हूं चल पड़ा हूँ जीवन पथ पर मंजिल मीलों दूर है, चलना मेरी मजबूरी है। हां मैं मजदूर हूं-हां मैं मजदूर हूं बिना रुके बिना थके आसमान के साथ मैं चल पड़ा हूं धूप की छांव में,चलने को मजबूर हूं। हां मैं मजदूर हूं-हां मैं मजदूर हूं जीने की आस लिए परिवार को साथ लिए, असंभव को संभव करके चलने को मजबूर हूं। हां मैं मजदूर हूं-हां मैं मजदूर हूं  अपने ही घर में प्रवासी बनकर, चल पड़ा हूं निराश होकर क्योंकि मैं मजबूर हूं। हां मैं मजदूर हूं - हां मैं मजदूर हूं  बचत की खपत के बाद , शहर की बेरुखी से गांव की गोद में जाने को मजबूर हूं  हां मैं मजदूर हूं - हां मैं मजदूर हूँ थकान के चादर में पटरियों पर मौत की नींद सोने को मजबूर हूं । हां मैं मजदूर हूं - हां मैं मजदूर हूं  छाती में चिराग की दूध लिए बिना ममता लुटाई, आंचल समेटकर दुनिया छोड़ जाने को मजबूर हूं। हां मैं मजदूर हूं - हां मैं मजदूर हूं प्रशांत गौतम ✍️✍️ मुजफ्फरपुर,बिहार

बिहार चुनाव

बिहार चुनाव का परिणाम जो भी होता है लेकिन बिहार के विकास के लिए आने वाली सरकार की प्रतिबद्धता बहुत अधिक मायने रखती है जब बिहार में विधानसभा चुनाव होने को होता है , तो समस्त बिहारवासी जागृत तो होते ही है परंतु जब नतीजा आने वाला होता है तो समस्त देशवासी जागृत हो जाता है ।  उसके बाद क्या होता है? बिहारवासी भी निष्क्रिय होते है और साथ-साथ देश भी। जिसका निष्कर्ष यह निकलता है कि विकास की गति रुक जा रुक जाती है एवं बिहार वही पुराना बिहार की तरह खुद को बनाए रखता है। रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, भ्रष्टाचार, अपराध, पलायन आदि विषयों पर जब तक कि सरकार से लेकर जनता इसके निवारण के लिए प्रतिज्ञा नहीं लेगी तथा उस प्रतिज्ञा को पूर्ण करने के लिए खुद को नहीं लगाएगी तब तक हम अपने बिहार को ऐसे ही उथल-पुथल की यथास्थिति में देखने को मजबूर रहेंगे। प्रशांत गौतम✍️✍️ राजनीति विज्ञान बिहार विश्वविद्यालय

बंगाल चुनाव 2021

2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की करारी शिकस्त से यह बात तो साफ हो गया है की किसी भी राज्य की क्षेत्रीय दल जो सत्ता में है या विपक्ष में अगर अपनी रणनीति के तहत शत प्रतिशत मेहनत जनहित के साथ खड़ा रहती है तो उसकी जीत सुनिश्चित मानी जाएगी।