मेरे सिवा कोई और मुझे भाता नहीं .....तेजस्वी यादव ने पप्पू यादव और कन्हैया कुमार को मंच पर चढ़ने नहीं दिया
बहुत समय पहले की बात नहीं हैं एकदम से पुराना हुआ खबर को निकालने की कोशिश कर रहा हूं देखिए कितना हद तक यह सही हो पाता हैं ........।
तो अर्ज किया हैं ........... इरशाद इरशाद......
बिहार में एक बहुत बड़े वाले शातिर बतोलेबाज नेता हुआ करते थे जो अभी भी हैं लेकिन थोड़ा ठीक नहीं हैं उनके दो नुमाइंदों ने उनकी भरपाई के लिए कमर कस कर मैदान में उतर चुके थे।
एक हैं रंगा तो दूसरा बिल्ला
बिल्ला को हम बहुत अच्छा मानते हैं जो मन में होता हैं वो अपना कर देता हैं सब मिलकर राजनीतिक विवाह करा दिया वो भी कर लिया लेकिन जब नहीं चला तो छोड़ भी दिया अब जब जो पसंद थी उसके साथ रहना चाहता हैं तो सब मिलकर इसी को घर से बाहर का रास्ता निकाल दिया और तो और राजनीतिक रूप से भी अपंग बना कर छोड़ दिया गया लेकिन आदमी मस्त हैं अभी उसका संघर्ष के दिन जारी हैं।
इसमें रंगा बहुत बड़ा मास्टरमाइंड हैं जिसमें अद्भुत प्रतिभा है कि जैसा गोल मटोल हैं वैसे हीं खूब गोल गोल बात करता हैं आजकल जलेबी की तरह सीधी घोषणा पत्र जारी करता हैं एवं गाय जैसी जनता को चारा चोरी की कहानी के फायदे बतलाता हैं रंगा इतना कमाल का हैं कि मौसम की तरह खुद पर नियंत्रण रखता हैं बदलता हैं लेकिन समय के साथ, कभी कभी बिन बदरी बरस भी जाता हैं जब बात खुद पर आ जाती हैं ।
कोई रहें या न रहें बस मुझको रहना चाहिए....... रंगा खुश हुआ
क्योंकि बिहार बंद का आवाह्न था सब विरोधी दल झुंड बनाकर कुछ जगह कब्जा करने में लगे थे और उसके सहयोग में ही कई दिग्गज आए थे कि मैं भी हूं अटेंडेंस के लिए ।
लेकिन रंगा तो रंगा था वो खबरदार कर चुका था अपने दरबारी सहयोगी को कि किसी भी हाल में उन दोनों नुमाइंदों को जिससे मुझको खतरा हैं मंच वाला ट्रक पर चढ़ने नहीं देना हैं और वहीं हुआ भी एक के पैर में चोट लग गई और दूसरे को कहीं और जाना पड़ गया जिससे रंगा अब सुरक्षित था और खूब झूम झूम के हाथ मुंह हिला रहा था जय हो जय हो कर रहा था और बगल में कईं नमूनों के साथ मिलकर खुश था मन हीं मन गीत गा रहा था ।
मुस्कुराने की वजह सिर्फ हम हैं........
कोई और बढ़ जाए तो मुझे चैन आता नहीं .........
प्रशांत गौतम
मुजफ्फरपुर, बिहार से
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